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हर सनातनी घर को तीन दिव्य तत्वों की आवश्यकता होती है-रक्षा, समृद्धि और शुद्धि। एक ही यज्ञ, एक ही अग्नि और एक ही संकल्प से सिद्ध यह अद्वितीय बंडल। शास्त्रों के अनुसार, प्रत्येक सनातनी गृह में तीन शक्तियों का संतुलन आवश्यक है- रक्षा (सुरक्षा), समृद्धि (विकास), और शुद्धि (पवित्रता)। यदि इनमें से एक की भी कमी हो, तो घर पूर्ण नहीं माना जाता। रक्षा का स्रोत है महाकाल का दिव्य सुरक्षा कवच समृद्धि आती है माँ महालक्ष्मी के श्री यंत्र से शुद्धि प्राप्त होती है यज्ञ अग्नि से उत्पन्न महायज्ञ भभूति से जब ये तीनों शक्तियाँ एक ही यज्ञ, एक ही कुंड, एक ही संकल्प और 1008 ब्राह्मणों द्वारा एक ही समय में सिद्ध होती हैं, तो इनकी शक्ति केवल जुड़ती नहीं बल्कि कई गुना बढ़ जाती है। इसे ही त्रि-शक्ति संयोग कहा जाता है- तीन दिव्य शक्तियों का अद्वितीय मिलन।
अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त वस्तुओं में अलग-अलग संकल्प और ऊर्जा होती है। वे साथ तो रह सकती हैं, पर पूर्ण सामंजस्य नहीं बना पातीं। लेकिन जब तीनों एक ही अग्नि और एक ही संकल्प से उत्पन्न होते हैं: श्री यंत्र माँ लक्ष्मी को आमंत्रित करता है।कवच उस समृद्धि की रक्षा करता है।भभूति उस स्थान को शुद्ध करती है जहाँ वह ऊर्जा प्रवेश करती है। इस प्रकार यह पोटली आपके घर के चारों ओर एक संपूर्ण रक्षा-समृद्धि चक्र स्थापित करता है।
तीन शक्तियाँ, एक स्रोत से उत्पन्न। अलग-अलग स्रोतों की वस्तुएँ पूर्ण समन्वय नहीं बना पातीं, परंतु एक ही अग्नि और संकल्प से उत्पन्न होने पर वे आपके घर में एकीकृत दिव्य ऊर्जा का निर्माण करती हैं।
किसी भी मंदिर, पीठ या तीर्थ में 1008 ब्राह्मणों द्वारा सिद्ध कवच, यंत्र और भभूति का ऐसा संयोजन पहले कभी प्रस्तुत नहीं किया गया। यह वास्तव में अपनी तरह का पहला है।
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